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23 Feb 2023 · 1 min read

दुआ के हाथ

काश, इतने लायक बनें हम
किसी का साथ दे सकें
ज़्यादा नहीं तो कम से कम
दुआ के हाथ दे सकें…
(१)
कोई मसीहा कहलाने का
हमें शौक तो नहीं मगर
किसी बीमार इंसान को
थोड़ी-सी सांस दे सकें…
(२)
दिन भर की मेहनत के बाद
थका-हारा जो घर लौटे
उसे अपने लोगों के बीच
चैन की रात दे सकें…
(३)
इस दुनिया को छोड़कर
जाने से पहले ही इसे
दोस्ती और मुहब्बत की
कोई सौगात दे सकें…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
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