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23 Feb 2023 · 1 min read

कोई पत्ता कब खुशी से अपनी पेड़ से अलग हुआ है

कोई पत्ता कब खुशी से अपनी पेड़ से अलग हुआ है
मजबूर होकर ही कोई अपने अपनों से जुदा हुआ है

जिसको थोड़ी सी हसरत दी है , जमाने ने यहाँ
वह ही अपनी नजर में आजकल खुदा हुआ है

कवि दीपक सरल

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