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20 Feb 2023 · 1 min read

जी नहीं पाती विधवा रानी

********* जी नहीं पाती विधवा रानी *********
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जीना तो चाहती है पर जी नही पाती विधवा नारी,
खुलकर दिल की बात कह नहीं पाती विधवा नारी|

मन की बात मन में ही तो सिमट कर रह जाती है,
दुनिया के सामने नजर उठा नहीं पाती विधवा नारी|

मजबूर को सदा मजबूर करती आई है दुनियादारी,
भेड़ियों से आंचल को बचा नहीं पाती विधवा नारी|

बुरी नियत से नियति भंग होती सदियों मे है आई,
बनावटी हंसी में गम छिपा नहीं पाती विधवा नारी|

खुदा की खुदाई की तो चोट सह जाती है मनसीरत,
जमानेभर के दर्द को सिमेट नहीं पाती विधवा नारी|
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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