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16 Feb 2023 · 1 min read

*हमारे बीच फिर बातें, न जाने कल को होंं न हों (हिंदी गजल/ गी

हमारे बीच फिर बातें, न जाने कल को होंं न हों (हिंदी गजल/ गीतिका)
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1
हमारे बीच फिर बातें, न जाने कल को होंं न हों
सुबह फिर शाम ये रातें, न जाने कल को हों न हों
2
किसे मालूम है किसकी, लिखा किस्मत में कल क्या है
ह‌मारी फिर मुलाकातें, न जाने कल को हों न हों
3
मौहब्बत के नशे में देर तक आओ चलो भीगें
गगन से फिर ये बरसातें, न जाने कल को हों न हों
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रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा,रामपुर,उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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