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14 Feb 2023 · 1 min read

अय मुसाफिर

है जिंदगी ये सीर नेकी बदी का वसल,
बोया बबूल बाग न हो आम की फसल।
हर कदम फूंक फूंक कर चलना अय मुसाफिर,
मौला ने निवाजा है हर इंसान को अकल।

सतीश सृजन

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