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12 Feb 2023 · 1 min read

दिल की दहलीज पर कदमों के निशा आज भी है

दिल की दहलीज पर कदमों के निशा आज भी है
दिल में आहिस्ता-आहिस्ता सा दर्द आज भी है |

वह कौन सी जिद में मगरूर हो कर बैठा है
मेरे दिल में उसके लिए मोहब्बत आज भी है

कवि दीपक सरल

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