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12 Feb 2023 · 1 min read

उम्मीदों का उगता सूरज बादलों में मौन खड़ा है |

उम्मीदों का उगता सूरज बादलों में मौन खड़ा है |

जीत उसी ने पाई है , जो संघर्षों से लड़ा है |

सामने सूरज हो भले वह अकेला खड़ा है …|

खुद पर भरोसा उसे जुगनू सा वो अडा है …|

लाखो संघर्ष चाहे, मार्ग में भले उनके………,

उसकी जिद के आगे उसका हौसला बढ़ा है |

अनन्त हार से भी मुकम्मल खड़ा है |

जीत का जज्बा , आसमान से बड़ा है |

कवि दीपक सरल

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