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11 Feb 2023 · 1 min read

नहीं हूँ मैं किसी भी नाराज़

नहीं हूँ मैं किसी भी नाराज़
मैं तो दुनिया के तौर तरीकों से हैरान हूँ
माली जो धूप में फूल उगाता रहा जीवनभर
मैंने कभी उसके हाथों में गुलदस्ता नही देखा
उन फूलों को मैंने फूल मसलने वाले हाथों
पर बंधते देखा है
इंसानियत की हार बनकर उनके गले में
सजते हुए देखा है…

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