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18 Feb 2023 · 1 min read

नौका विहार

प्रेम की नौका
कविता की नदी में
बहने के लिये होती है
दूसरा तट छूने के लिये नहीं ।

फिर भी नाव के साथ जुडे़ चप्पू
तुम नदी को प्रपात को बनने के पूर्व
नौका को सहारा देकर
किनारे लगा देना कहीं ।

मैं नदी में बहती नौका को
कुछ क्षण के लिये प्रपात बनाकर
नहीं चाहता क्षणिक सुख जो
नौका को धुंआधार कर दे वहीं ।

मेरी कामना है कि
घाट और पाट हो जहाँ
चप्पू नाव को थामना वहाँ
जहाँ बिराजे हों महीं ।

पावन धरातल पर हमेशा
युगों युगों से आज भी
बँधी नावें जुड़ी नद से
रस रंग को स्वर दे रहीं ।

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