*मशहूर लोग( कुंडलिया )*
मशहूर लोग( कुंडलिया )
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मरघट तक पहुँचा रहे , केवल रिश्तेदार
कहाँ प्रशंसक पूछते , कैसे हैं बीमार
कैसे हैं बीमार , रोज मर – मर कर जीते
कहने को मशहूर , किंतु भीतर से रीते
कहते रवि कविराय,न हो अपनों से खटपट
संबंधी बस चार , देख लो जाते मरघट
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रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 999761 5451