Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
9 Feb 2023 · 1 min read

नामवर रोज बनते हैं,

नामवर रोज बनते हैं,
बिगड़ते रोज हैं कितने।
है आब ए दरिया सी दुनिया,
मौज उठ कर गिरे जैसे।

सतीश सृजन

Loading...