Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
8 Feb 2023 · 1 min read

अब सुनता कौन है

ईश्वर तेरे जगत के, बड़े निराले खेल।
खूब पनपता झूठ है, सूखे सच की बेल।।

सीख लिया रहना यहां, धारण कर के मौन।
सच के मीठे बोल को, अब सुनता है कौन।।

हुए अखबार की तरह, पढ़कर डाला फेक।
दुनिया ऐसी हो गई, कर्म भुलाते नेक।।

मुँह से मीठा बोलकर, दिल में रखते भेद।
ऐसे जन का त्याग कर, करो नहीं फिर खेद।।

कड़वी बोली बोलकर, जो जन देते घाव।
जीवन में उनसे कभी, होता नहीं लगाव।।

Loading...