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7 Feb 2023 · 1 min read

अज्ञात के प्रति-1

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हे प्रिय! तुम मेरी निन्दा भी मत करो, मैं तुम्हारी स्तुति भी नहीं करता हूँ।

-अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

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