मेरा काम तेरा इनाम
मोहब्बत करना मेरा काम है,
इसमें नफा और नुकसान तुम्हें देखना है।
मेरा काम है तुम्हें प्यार करना,
इसमें डूबना या तरना तुम्हें देखना है.!
कि मैं सोता नहीं हूँ खोता हूँ सपनो में तेरे,
मेरी रातों में आना या ना आना,
ये तुम्हें देखना है
खुद को खोकर मैं तुझमें मस्त मौला हो गया हूँ,
मेरी मस्ती में मस्त होना और खोना
ये तुम्हें देखना है..!
मेरी हर नजर में है हर तश्वीर तेरी,
मुझे अपना आईना बनाना या तोड़ देना,
ये तुम्हें देखना है…
मैंने तो चुन लिया है,
चुनना था जिसको मुझे,
मुझे चुनना या इनकार तुम्हें देखना है..!
मेरा हर जन्म तो है तेरे वास्ते ही,
मुझसे हरबार मिलना या ना मिलने
ये तुम्हें देखना है..!!
प्रशांत सोलंकी..
नई दिल्ली-07