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5 Nov 2022 · 1 min read

जय जय जय शनिदेव

“जय जय जय हे शनिदेव”
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हे न्यायप्रिय,नवग्रहों के न्यायधीश,
दण्ड के विधान का पालन करते।
हर जन सदा रहता है भय से दूर,
शुभ कर्म करें,प्रोत्साहित करते॥

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हे सूर्य भगवान अरु छाया सुत,
घोर तप मय शिव भक्ति ही से।
आशीष मिले मात -पिता तब,
श्रद्धा सुमन संग तिल अर्पण से॥

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छवि अति सुंदर और मनोहर,
हार रूप में अनुपम वलय मिले।
कृष्ण रंग शोभा, मन की शोभा,
दोष हटे जन तन मन बहु खिले॥

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शनिवार अति प्रिय शनिदेव को,
तेल स्नान शिला हर अंग-अंग सजे।
नील पुष्प चरणों में हो नित अर्पित,
उड़द दाल की खिचड़ी भोग लगे॥

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शीला सिंह बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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