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30 Oct 2022 · 1 min read

मेरा खुद का अस्तित्व भी ख़ो गया...!!

मैंने क्या ख़ो दिया कैसे तुम्हें बताऊँ…
एक ज़िन्दगी का आसरा,
एक जीने की उम्मीद…
वो ना होकर भी हैं रूबरू,
मेरी ख़ामोशी में हैं हूबहू,
दब चुकी है दिल की आवाज़,
जैसे ख़ो गया खुद का ग़ुरूर,
एक उदासी-सी हैं चेहरे पे,
माथे पर एक अलग-सी शिकन,
दुनिया के हिस्से की एक अमानत ख़ो गयी,
एक अनमोल नगीना गुम गया,
एक आख़री ख्वाहिश रह गयी,
एक गुजारिश थी जिनके लिए तख़्त-ओ-ताज बनाने की,
वो शख्स मेरे हौसले की एक मात्र उजली किरण थी, सब ख़ो गया…
आखरी पल का हाल भी कुछ ऐसा था,
वो खामोश थी, मैं स्तब्ध था,
ना वो कुछ कह सकी और ना मैं कुछ कह पाया,
ना मैं दर्द कम कर सका,
ना उस ख़ामोशी को आवाज़ में बदल सका,
ये तकल्लुफ बना रहा,
खुद से शिकायत बनी रही…
क्या बताऊँ मैं अब किसी को,
जीने की उम्मीद ही मैं ख़ो गया…!!
सब ख़ो गया… सब ख़ो गया…
मेरा खुद का अस्तित्व भी ख़ो गया…!!
❤Love Ravi ❤

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