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22 Oct 2022 · 1 min read

नीति दोहे

समय कभी ना तोलिए, समय बड़ा बलवान
राजा होय रंक कभी, रंक बने धनवान।

आज समय कुछ और है, काल रहेगा और
विष्णू साधो बन गया, कल तक था जो चोर।

समय बन सब काम सरे, समय बिगाड़े काम।
गधे सिर पर ताज रखे, चले समय जो साथ।

-विष्णु प्रसाद ‘पाँचोटिया’

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