Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
22 Oct 2022 · 1 min read

* चांद बोना पड गया *

डा . अरुण कुमार शास्त्री –
❤️🅰️एक अबोध बालक 🅰️❤️ – अरुण अतृप्त

चाँदनी के शहर में
एक चांद बोना पड् गया
रोशनी तो कम न थी
आकार छोटा पड़ गया
देख कर के मैं अचंभित
इस जगत के खेल न्यारे
धरती मैय्या भी
विस्मृत चमत्कृत
हुइ सब देख देख
व्योम का विस्तार
छोटा पड़ गया
चाँदनी के शहर में
एक चांद बोना पड् गया
रोशनी तो कम न थी
आकार छोटा पड़ गया
दिन दीवाली का अपुरव
जगमग जगमग जगत सारा
इक अकेला चन्द्रमा
बाद्लों ने ढक लिया
चाँदनी के शहर में
एक चांद बोना पड् गया
रोशनी तो कम न थी
आकार छोटा पड़ गया

Loading...