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20 Oct 2022 · 1 min read

एक पत्नि की पाती पति के नाम

बालम तेरे बाग में,आ गया आम पर बौर।
जल्दी आ जाओ,नही आम खायेगा और।।

सावन का महीना है साजन,घटा घिरी घनघोर।
पत्नि तुम्हारी राह जोह रही,जाना कही न और।।

सावन का महीना है,पावन कर रही है शोर।
पतंग अपनी उड़ा लो कही कट न जाए डोर।।

उपवन पूरे यौवन पर,भौरें मंडरा रहे चहुं ओर।
मकरंद वे अब पी रहे,बचेगा नही अब कुछ और।।

दिवाली भी आ गई, दीप जल रहे चहुं ओर।
आ जाओ साजन मेरे,अब देर करो न और।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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