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4 Oct 2022 · 1 min read

फिर से दर्शनें को।

बौख रहा मेरा मन
तड़प रहा मेरा मन
नवजीवन पाने को
फिर से दर्शानें को
जीवन-चक्र इसी पर चलता हैं।
मौत भी इसी पर टिका है।
धूरी जीवन-मौत की धरी हैं।
अब तो वक्र (टेढ़ा) समय में भी सीधी (सरलता जी रहीहूं) खड़ी हूं।

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