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22 May 2022 · 1 min read

दुआ

रात ढली और सुबह जगी
भर गयी रौशनी कण कण में ,
खुश्बू से लजाते फूलों सा
सुख हो सबके जीवन में ,
सूरज की जलती काया से
उजाले में ढलती दुआ कोई ,
मंज़िल का एक निशां बनके
भर देती जोश नया मन में ,

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