Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
6 Jan 2022 · 1 min read

ग़ज़ल:-सुन रे मनवा जिन्दगी इक मेला है।

ग़ज़ल
====

सुन रे मनवा जिन्दगी इक मेला है,
कोई संग नही तेरे बस तूं अकेला है।
=====================

हाथ को हाथ की यहां खबर नही,
अजीब दुनिया का, अजीब खेला है।
=====================

अपने हमाम मे यहां हर कोई नंगा
वस्त्र है साफ,अन्दर से मन मैला है।
=====================

सियासत के है यहां सब बादशाह,
है सब गुरु ही गुरु, कोई न चेला है।
=====================

दुनिया की है यहां रीत बड़ी निराली,
दौलत वाला देव,गरीब इक ढ़ेला है।
=====================

इक आंख मे आंसू, इक मे खुशियां,
सुन”जैदि” जिंदगी का यही खेला है।
=====================

शायर:-“जैदि”
एल.सी.जैदिया “जैदि”

Loading...