Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
26 Dec 2021 · 1 min read

गीतिका

करीब इतनी कि फासले न रहे
फासले इतने कि दूरियां न रहे

दिन हवा रात धुआं शाम नदारत
जब से वो लम्हे दरमियां न रहे

लगा कई बार फासले मिट गये
गिले शिकवे की निशानियां न रहे

लगा मेरे ही बदन का हिस्सा हो
बहुत खूब ये गलतफहमियां रहे

न हुई एक आखिरी मुलाकात भी
करें क्या बात कि नजदीकियां रहे

स्वरचित मौलिक सर्वाधिकार सुरक्षित
अश्वनी कुमार जायसवाल कानपुर 90441342970

Loading...