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15 Jun 2021 · 1 min read

हसीं ख़्वाबों में !

हसीं ख़्वाबों में !
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आज मुझे मन नहीं लग रहा !
याद मुझे है कोई कर रहा !
मन मेरा बहुत कुछ कह रहा !
न जाने ये कहाॅं-कहाॅं बहक रहा !!

कभी-कभी ये बेहिसाब चहक रहा !
दिल भी मेरा धक-धक धड़क रहा !
बेसब्री से राह किसी की तक रहा !
रात्रि में भी तारे ये गिन रहा !!

सचमुच हम कितने मजबूर हैं !
रहते हम कितने दूर – दूर हैं !
किस्मत को भी यही मंज़ूर है !
जो भी हो हमें ये कुबूल है !
पर चाहत मेरी उस ओर है !!

हमसफ़र जो साथ होती मेरे !
हसीं ख्वाबों में हम खोए रहते !
कभी हम सपने देखते रहते !
कभी सपनों में ही खुद को ढूंढ़ते !!

_ स्वरचित एवं मौलिक ।

© अजित कुमार कर्ण ।
__ किशनगंज ( बिहार )
दिनांक : 15-06-2021
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