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15 Jan 2021 · 1 min read

दुविधा में सरकार है

जरा सोचो तुम, हमारी जनता लाचार है ।
कैसे हैं नेता तुम्हारे, कैसा इनका विचार है।
कुछ पैसों की लालच में तुम,
इतने लालची जो हो गये ।
आगे पीछे कुछ सोचे हो तुम,
यहाँ सब, अब तुमसे आजिज हो गये ।।

गर, मृत्यु बाद तेरा,
इन्हीं घरों में जो जन्म हुआ ।
तो क्या होगा तुम्हारा,
और तुम्हारी कौम का ।
पहले तो बहुत खुश थे तुम,
अब इतना ही सुन, तुम रो गये ।।

तेरी आँखों में आँसू आने का,
यह बहुत बड़ा संकेत है ।
सारी गणित समझ गये या,
अब भी मन में भेद है ।।

पैसों की लालच ने,
अंधा कर दिया तुम्हें,
तू कैसे करता था कारोबार ,
जो यहाँ बढ़ता बेरोजगार है ।
सुविधा किसी को मिला नहीं है,
इसी के चलते तुम्हारी,
आज दुविधा में सरकार है ।।

कवि – मनमोहन कृष्ण
तारीख – 06/08/2020
समय – 02:47 (सुबह)
संंपर्क – 9065388391

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