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14 Jul 2020 · 1 min read

समय अब भी है...??

ऐ मानव सुन लो मेरी बात जरा
आंखे तुम्हारी सहज सरल सी
दृष्टि क्यों विकराल भला,,,,,,।
वश में हो व्यसनों के तुम
विकार ही शायद छत है तेरा
ऐ मानव सुन लो मेरी बात जरा,,,,

(* आज मनुष्य जाति विकारों के वसीभूत होकर अपना हद पार करता जा रहा है । ईश्वर के अस्तित्व का हमे कुछ अंदाजा ही नहीं।)

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