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13 Jul 2020 · 1 min read

कहाँ गया वो बचपन।

आधुनिकता का परिधान पहने है आज का बचपन,
महँगे खिलौनों में सिमट गया है आज का बचपन,
खुले आसमान के नीचे खेलने का रिवाज नहीं अब,
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कैद है आज का बचपन,
कहाँ हैं कागज की कश्ती,कहाँ मैदानों में है मस्ती,
इन सब खेलों से रिक्त हुआ है आज का बचपन,
जिस मिट्टी की खुशबू में हम खेले, कूदे,बड़े हुए,
उसी मिट्टी की खुशबू से दूर भागता आज का बचपन,
पहले जैसा कुछ नही अब,सब जैसे हुआ है लुप्त
बनावटी दुनिया में बना बनावटी आज का बचपन।
By;Dr Swati Gupta

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