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15 Jun 2020 · 1 min read

आत्महत्या

कितने मुश्किलों से
दम उसने तोड़ा होगा
कैसे उसने उस
तड़प को सहा होगा
जब आखिरी साँस ने
तन का पिंजरा छोड़ा होगा
अंग-अंग उसका
कितना तड़तड़ाया होगा ?

क्या तब उस पल
याद अपनों की उसे
पल भर के लिए भी न आई होगी
उसकी नज़रों में अम्मा की आँचल
न लहरायी होगी
बाबा का हाथ इशारे से
न बुलाया होगा
राखी के धागों में लिपटी
बहन का प्यार न बुलाया होगा
दोस्तों के महफिल की बेपरवाह हँसी
कानों में न गूंजी होगी ?

यक़ीनन याद उसे तो
सब कुछ ही आया होगा
फिर इन यादों के भंवर से निकलने को
युद्ध ख़ुद से ही उसने किया होगा
वार कितने ही उसने सहा होगा
मुक्त अपने ही तन से
जब हुआ होगा
ओह!
कितनी हिम्मत उसने जुटायी होगी
करने को आत्महत्या।

©️ रानी सिंह

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