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15 Jun 2020 · 1 min read

ख़ुदकुशी

खुदकुशी से खुशी, क्या कोई भी पाते हैं।
त्यागकर निज प्राण, सबको ही रुलाते हैं।
हो जाते मुक्त भले ही, खुद पीड़ा से वे-
जीवन भर तिल-तिल,अपनों को तड़पाते हैं।

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