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15 Jun 2020 · 1 min read

उसके बस की बात नहीं है

बहता दरिया रोक के रखना ।
उसके बस की बात नहीं है ।।

जलते अंगारों पर चलना ।
उसके बस की बात नहीं है।।

जो फूलों सी पगडंडी पर ।
हो बैठा चलने का आदी ।।

वक्र पंथ में पग न रखा हो ।
राह चला जो सीधी सादी ।।

कंटक मग पर फिर पग धरना ।
उसके बस की बात नहीं है ।।..

जिसने तो अपने जीवन भर ।
आलस गह कर त्यागा श्रम को ।।

देखा नहीं कभी भी उसने ।
जीवन में मेहनत के क्रम को ।।

मातृ भूमि पर टूट बिखरना ।
उसके बस की बात नहीं है ।।..

जो तुम देख रहे खण्डहर है ।
यह पुताई से चमक रहा है ।।

जीर्ण शीर्ण है यह अंदर से ।
बाहर से ही दमक रहा है ।।

श्रृंगारों के बिना निखरना ।
उसके बस की बात नहीं हैं ।।..

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