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13 Jun 2020 · 1 min read

तुम और हम

तुम और हम
सूखी नदी के दो किनारे।
जिसे कभी न लहरें जोड़ सकेगी न हवा।

तुम और हम
जीवन में हर क्षण के नासूर ।
जिसे कभी न दुआ मिटा सकेगी न दवा।

-शशि “मंजुलाहृदय”

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