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13 Jun 2020 · 1 min read

उससे चाहत की चाह रखी तो

उससे चाहत की चाह रखी तो आह मिली हमें
दोबारा फिर इश्क़ न करना ये सलाह मिली हमें।

हमने ख़ुशी की चौखट पर रात भर अश्क़ बहाए
सुबह हुई तो फ़क़त ग़म की पनाह मिली हमें।

अचानक नींद खुली तो ख़याल-ए-ज़ीस्त आया
ग़ौर से देखा तो ज़ीस्त हमारी तबाह मिली हमें।

पुराने इश्क़ का फरेब और न हमसे झेला जाता
अच्छा हुआ कि नए इश्क़ की अफ़्वाह मिली हमें।

यूँहीं मौत की बाहों में समाकर न मुस्कुराते हम
क्या कहे कि इसीसे ज़रा सी परवाह मिली हमें।

जॉनी अहमद ‘क़ैस’

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