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12 Jun 2020 · 1 min read

नन्हीं छोटी चिड़ियारानी

नन्हीं छोटी चिडियारानी
पंख तुम्हारे पीले धानी
चूं चूं करके कुछ कहती हो
अपनी धुन में खुश रहती हो

चिडियारानी माह जून का
बढ़ा रहा है ताप खून का
क्यों घर के बाहर रहती हो
सूरज का आतप सहती हो

समझ गया मैं चिडियारानी
ढूंढ़ रही हो दाना पानी
दूँगा तुम्हें चोंच भर दाना
ठहरो मैं लाता हूँ खाना

खाओ रोटी चार निबाला
पानी पियो बिस्लरी वाला
खुद भरपेट यहीं पर खाना
फिर घर पर भी लेकर जाना

चिडियारानी धूप बहुत है
सुंदर तेरा रूप बहुत है
सुंदर पंख सुनहरे वाले
तपकर अगर हो गए काले

शायद पता चले ना तुझको
अच्छा नहीं लगेगा मुझको
अपने घर का पता बताना
पहुंचा दूँगा पूरा खाना

या फिर रह लो मेरे घर पर
डलवा दूँ छोटा सा बिस्तर
हवा यहीं कूलर की खाना
गर्मी में बाहर मत जाना

संजय नारायण

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