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12 Jun 2020 · 1 min read

बम नहीं ब्रह्मास्त्र है

बम नहीं ब्रह्मास्त्र है, धमाके नहीं शांति की आवाज है
130 करोड़ हिंदुस्तानी जांबाज है
तुम क्यों बौखलाते हो, प्रतिबंधों की तलवार दिखाते हो
बंधु हमें आत्मसम्मान सबसे प्यारा है
मेरा हिंदुस्तान सबसे न्यारा है
त्याग तपस्या बलिदान ही हमारा नारा है
तुम विकसित कहलाते हो कमज़ोरों को सताते हो
बंधु यह धर्म धरा है, यहां तो बस त्याग ही भरा है
हम मातृभूमि के लिए जिएंगे, मातृभूमि के लिए मरेंगे
भारत माता की शान के खिलाफ
तुम्हारी सहायता तो क्या, सब कुछ तजेंगे
आप विध्वंस कारी हथियार गढ़ रहे हैं
घातक जखीरे बढ़ रहे हैं
दसकों से हम आतंकवादियों से लड़ रहे हैं
लोग छद्म शांति के कसीदे गढ़ रहे हैं
चायना जब तब आंख दिखाता है
सीमाओं पर शक्ति दिखाता है
अपनी कुटिल चालों से बाज नहीं आता है
दुनिया का संतुलन किसने बिगाड़ा
नागासा हिरोशिमा किसने उजाड़ा
आवाज पोखरण में 1974 मैं भी आई थी
विश्व शांति के लिए जो इंदिरा जी ने लगाई थी
बंधु यह बम नहीं अटल संदेश है, समय बड़ा विशेष है
विश्व का 21वी सदी में प्रवेश है
श्रीमान विश्व नागरिक बनिए
मानवता के लिए स्वार्थ तजिए
सारे मतभेद परमाणु भट्टी में जलाईए
उर्जा बनाईए, वसुंधरा को सत्यम शिवम सुंदरम बनाइए
हम तो वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास करते हैं
सर्वे भवंतू सुखिन: दिन-रात जपते हैं
सत्य अहिंसा प्रेम के पुजारी हैं
राक्षसों को ब्रह्मास्त्र धारी हैं
हमने तो भगवान बुद्ध का जन्मदिन मनाया है
अपने आत्मसम्मान को जगाया है
हम वंदे मातरम गाएंगे
विश्व शांति का परचम विश्व में लहराएंगे

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