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10 Jun 2020 · 1 min read

*वक्त की नज़ाकत*

वक्त-वक्त का तकाजा है,
पुराना तो कभी ज़ख्म ताजा है,
हैरान है दुनिया वक्त की इस नज़ाकत से,
टी बी, केंसर, हैजा,
अब कोरोना से नवाजा है||
मुरीद फिर भी है ये दुनिया वक्त की,
हो रिश्तेदारी जैसे मानवीय रक्त की,
साथ चलना नहीं छोड़ेगी परमाल मयंक,
आँधी भले ही चलती रहे वक्त बेवक्त की||

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