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10 Jun 2020 · 1 min read

हसरतें

आज मेरा जन्मदिन है।इस महत्त्वपूर्ण दिन के उपलक्ष्य में कविता/मुक्तक से बड़ी कोई सौगात नहीं हो सकती।कविता से ही जिंदा हूँ।जिंदादिली कविता में सादगी,असलियत व जोश पैदा करती है।सादर!
हमारे दिल का मयार अब टूटा है,
जिसे तराशा था वही अब छूटा है,
निगाहों में इतना गिरा नहीं उसके,
जितना मेरा दिल खुदी से रूठा है,
जिस्म मुझे अब इतनी तो गवाही दे,
मैं कुछ भी कहूँ सब मुझे सुनाई दे,
कैदी होकर खुद से खुदी बात करूं,
देखूं अंदर तो वह शख्स दिखाई दे,
गिला नहीं की मिला कुछ भी नहीं,
लगा निगाह में हुआ कुछ भी नहीं,
अन्दाज़ जीने का बदला इतना,
दिल खुदी कहे बुरा कुछ भी नहीं,
मयार फिर से ऐसा फ़ना करना है,
रूठने पर अब प्यार घना करना है,
मलाल नहीं मुझको कोई याद रखे,
दिल न बुरा करे यही मना करना है,

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