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10 Jun 2020 · 1 min read

शिकायतें

मैं अपनी सारी रातें तुझपे कुर्बान कर दिया
इश्क़ में ख़ुद को ही अंजान कर दिया ।

तुमसे मिलना महज़ कुदरत का करिश्मा था
जान जान कहकर मुझें बेजान कर दिया ।

इंसानों की इस बस्ती में नफ़रतें बेहिसाब है
इंसान ख़ुद को यहां हैवान कर दिया ।

तुमसे मिलकर जानां अब खोया सा रहता हूं
तुम्हारी सारी बातें मुझें परेशान कर दिया ।

खुदा को भी न बख्शें तुमने तो यहां पे
इधर इबादत की उधर एहसान कर दिया ।

मतलबी दुनिया में कौन किसका है ‘हसीब’
लोग इंसां को इंसां नही रहमान कर दिया ।

– हसीब अनवर

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