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9 Jun 2020 · 1 min read

हम खुद से हारे हैं

हम खुद से हारे हैं
बदले- बदले जो
अंदाज़ तुम्हारे हैं

भूले वादे अपने
जो दिखलाये थे
सब तोड़ दिये सपने
आँसू के धारे हैं
बदले -बदले जो
अंदाज़ तुम्हारे हैं

खुश थे तुमको पाकर
पाँव न पड़ते थे
तब अपने धरती पर
भूले न नज़ारे हैं
बदले -बदले जो
अंदाज़ तुम्हारे हैं

खुद आगे आते हो
फिर उसके ही तुम
अहसान जताते हो
किस ओर इशारे हैं
बदले -बदले जो
अंदाज़ तुम्हारे हैं

कुछ तुमसे कब चाहा
स्वप्न तुम्हारे थे
अपने मन मे ताहा
अब प्रश्न हमारे हैं
बदले -बदले क्यों
अंदाज़ तुम्हारे हैं

09-06-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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