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7 Jun 2020 · 1 min read

अभी से चेत जाओ तुम

नदी के गर्भ से इतना, न लेकर रेत जाओ तुम।
खजाना लूटकर ऐसे, न अपने केत जाओ तुम।
पड़ेगी मार जब उसकी, मिले जीवन नहीं फिर से-
प्रकृति के कोप को देखो,अभी से चेत जाओ तुम।

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