Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
6 Jun 2020 · 1 min read

दिल को भा जाए कोई

बातों बातों में यूँ दिल को भा जाए कोई।
आँख मीचूँ भी तो ख्वाब में आ जाए कोई।

जो मैं सो जाऊँ तो आहिस्ता जगाए कोई।
साथ जागे भी सपने भी दिखाए कोई।

अपनी आँखों में समन्दर भी छिपाए कोई।
इनमें धोखे से कहीं डूब न जाए कोई।

मरने वाला भी ये चाहे न बचाए कोई।
नज़रें कातिल हों तो क्यों ना मर जाए कोई।

दिल ये चाहे कि मुझको भी सताए कोई।
अपना गम कह के मुझे काश रुलाए कोई।

संजय नारायण

Loading...