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6 Jun 2020 · 1 min read

दिल ये भटकता है जनाब अच्छा नही लगता.

दिल ये भटकता है जनाब अच्छा नही लगता.
मत डालो चेहरे पर नकाब अच्छा नही लगता.

यूं तो कितने सितारें हैं आसमां की महफ़िल में.
पर कहीं छुप जाये महताब¹ अच्छा नही लगता.

सामने बिठाकर तुझको शाम ओ सहर सनम.
बिन तेरे फिर देखूं कोई ख़्वाब अच्छा नही लगता.

पता है तुमको दिल में बसी है सूरत तेरी.
मांगो मोहब्बत का तुम हिसाब अच्छा नही लगता.

तड़पाकर, सितम ढा कर, जलाकर प्यार में.
फिर करना कुछ सवाब² अच्छा नही लगता.

पहले चाहना और निभाना फिर तोड़कर दिल.
दे देना प्यार में जवाब अच्छा नही लगता.

सुनो अगर तुम तोड़कर प्यार भरा ये दिल.
पा भी लो कुछ खिताब अच्छा नही लगता.

आ जाओ के बस अब और मत तड़पाओ.
दिल ऐ दीप है बहुत बेताब, अच्छा नही लगता.

1. चान्द
2. पुण्य, नेकी, भलाई
✍️✍️…दीप

2 June, 2020
5:00 PM

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