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5 Jun 2020 · 1 min read

तमाम उम्र हम रोते रहे...

मैं दर्द से कराहता रहा,
तब भी मुस्कुराता रहा ।।
सबने अकेला कर दिया,
और बज़्म सजाता रहा ।।
सुकूँ चैन सब छिन गया,
जब भी गुनगुनाता रहा ।।
ज़िंदगी दूर होती रही,
आँख हर घड़ी रोती रही ।।
ज़ख्म और नासूर हुए,
सब अपने दूर हुए ।।
अश्क बहते हुए सोते रहे,
तमाम उम्र हम रोते रहे……………।।

#हनीफ़_शिकोहाबादी ✍️

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