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5 Jun 2020 · 1 min read

प्रीत हो सके, बिन बुलाई महमान l

प्रीत हो सके,
बिन बुलाई महमान l
सामने आते ही,
ना भटके ध्यान l
बस अटके ध्यान l
भागने, ना मटके ध्यान l
फिर प्यास ही प्यास पनपे,
उड़ने परवान l
करने कुर्बान l

अरविन्द व्यास ” प्यास “

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