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4 Jun 2020 · 1 min read

चंचल

मैने कभी पूछा नही
उसने कभी बताया नही
रोज रात कहां
चली जाती है वो ।

मुझे अकेला छोड़
किस की आगोश मे
रोज लक्ष्मण रेखा
लांघ लेती है वो ।

मिला नही जो
दिन के उजाले मे
रोज सपनो मे
तलाश लेती है वो ।

चंचल नादान है रूह मेरी
नित बदलती तृष्णा का
रोज नया रूप
ओढ़ लेती है वो ।।

राज विग 04.06.2020.

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