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4 Jun 2020 · 1 min read

हमसे हो न कोई दुःखी...

आ जाए अपना कोई,
इंतजार कर रहे ।
मन को बहुत समझाते,
वेदना कैसे सहे ।।

वो हँसी खिलखिलाती,
बहुत याद आती ।
भौर हो सुहावनी शाम हो,
चेतना वही पाती ।।

पल भर का वो रूठना,
देता आनन्द अपार ।
जब आँखे बंद करता,
दिखे रूप साकार ।।

कब तक आओगी,
उम्र अब बीती जाए ।
सूख चुके आँसू भी,
नयन दर्श कब पाए ।।

देख कर ऐसी दशा,
सोचती वे सखियाँ ।
क्या सुंदर पल थे,
अब चिढ़ाती गलियाँ।।

हमसे यह कह दो,
यह सब हैं कल्पना ।
मन को समझाएंगे,
फिर न देखेंगे सपना ।।

यथार्थ का धरातल,
होता बड़ा कठोर ।
सपने सब उड़ जाते,
रहता न कोई ठौर ।।

अच्छा बुरा क्या होता,
होते मन के ख्याल ।
कितना मन भटकता,
कितने बुनता जाल ।।

परम् सत्य यहीं जाना,
ईश्वर ही सच्चा स्वरूप ।
प्रेम को मान ईश समान,
हर प्राणी में वही रूप ।।

हमसे हो न कोई दुःखित,
रखते हैं यही ध्यान ।
सब सुखी स्वस्थ रहें,
यही है जीवन ज्ञान ।।

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