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2 Jun 2020 · 1 min read

बहार देखते हैं

कभी पानी तो कभी आग देखते हैं
हम तेरी आंखों में एक रेगिस्तान देखते हैं…..
भटक न जाएं इस भूल भुलैया में
इसलिए बाहर से ही भीतर के तूफान देखते हैं….
तुम करती हो गिला मेरी बेरुखी का
और हम अपनी रिहाई के आसार देखते हैं….
समझाया तो हमने भी बहुत खुद को,लेकिन
अब हम भी सहरा में ही बहार देखते हैं……

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