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2 Jun 2020 · 1 min read

शरारत कर दो

अपनी नशीली आंखों से शरारत कर दो.
मेरे टूटे लफ्जों को फिर से इबारत कर दो.

अपनी मोहब्बत बसाकर मेरे दिल में.
इस जिस्म ऐ खन्डर को इमारत कर दो.

शब ओ सहर रहो मेरे ख्वाब बनकर.
मेरे ख्यालों को तुम बशारत कर दो.

दिल के बदले लेकर दिल मेरा तुम.
बाजार ऐ इश्क में ये तिजारत कर दो.

देकर तपिश अपने सुर्ख लबों की जाना.
दीप की उखड़ी सांसों में हरारत भर दो.

✍️✍️…दीप

इबारत: लेख
बशारत: खुशख़बरी
तिजारत: व्यापार
हरारत: गर्मी

30 May, 2020
5:00 PM

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