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2 Jun 2020 · 1 min read

"खुशी-खुशी"

खुशी-खुशी विदा किया मेहमान की तरह।
तेरा आना कुछ-कुछ बरसात सा था।

मिलो गर कभी मिलना अनजान की तरह।
तेरा रव्वैया कुछ-कुछ बेपरवाह सा था।

हमने देखा मुड़कर नहीं यूं पथ्थर की तरह।
तेरा चलना कुछ-कुछ जलप्रपात सा था।
-शशि “मंजुलाहृदय”

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