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2 Jun 2020 · 1 min read

चढ़ गई दहेज की भेंट नववधू

चढ़ गई दहेज की भेंट नववधू
आज खबर यह फिर आई
संदिग्ध मिला अधजला शव
खुद जल गई या आग लगाई
खबर लगे मैंके बालों को
इसके पहले चिता जलाई
छूटी नहीं हाथ की मेंहदी
पीहर जिंदा लौट न पाई
कैंसी है ये सभ्य समाज
भूख दहेज की छोड़ न पाई
अमंगल हुआ ये मंगल परिणय
वेटी के वाप की शामत आई
सब कुछ लुटा दिया उसने
लोभियों की भूख मिटा न पाई
भगवान करे दहेज लोलुप का
कभी न घर संसार वसे
वंश न आगे बढ़ पाए
जनम- जन्म कुंआरा ही मरे
उपेक्षित हो जाए समाज में
कोई न कन्यादान करें

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