Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
31 May 2020 · 2 min read

◆◆【【{{जी जनाब}}】】◆◆

मेरे अस्तित्व की कहानी के रंग हज़ार थे,
बचपन से लेकर जवानी के किस्से हज़ार थे.

सब गुजरा धीरे धीरे वक़्त खुशी गम की दहलीज
पर,कुछ रोशन कुछ मायूस दिल के हिस्से हज़ार थे।

दुनिया की भीड़ में कुछ हुनर हमारा भी था,कुछ
पाने को हम भी बेताब थे.

अरमानो का लिबाज़ हमने भी ओढा था,ये कलम
कागज़ के खेल में हम भी लाजवाब थे।

बचपन था मेरा सतरंगी पींघ पर नाचता,जवानी में
हम भी यारों के यार थे.

थी मोहब्बत हमको एक जानशीं से जवानी ज़ोर में,
होंठ जिसके गुलाब रंग,चेहरा तो मानो चाँद सी किताब थे।

खेल कूद में गुजरती रही ज़िन्दगी,माँ बाप की खुशियों के
हम भी ख्वाब थे.

थे शौंक हमारे भी आसमान चूमते,गलियों शहरों में रोशन
कभी हम भी आफताब थे।

पहली झलक थी उसकी दिल पर बिजली सी गिरी,नखरे
अदा तो उस चाँद के बा-कमाल थे.

उसकी उड़ती जुल्फों का जादू मुझ पर भी हुआ, हम भी कहाँ रोक पाये खुद को,हम भी तो आदतन आशिक़ मिजाज थे।

गुजरता रहा वक़्त जिंदगी की कशमकश में,कुछ टूटी हसरतों
के भी उजागर राज थे.

एक वक्त तो हम भी थे तन्हाईयों में मशहूर,तब सांसों की धुन
पर दर्द के साज़ थे।

दिल तो हमारा भी टूटा है औरों की तरह,पर हौंसले हमारे ना
काँच थे.

समेटना भी हमने सीखा खुद को जलाकर,ये तपती आग की
कभी हम भी आँच थे।

खैर संभाला हमने खुद को एक मोड़ पर आकर,महसूस हुआ
जब अपने नाराज़ थे,

हिम्मत की डोर पर हमने भी उड़ाई एक पतंग,मुक़ाबले में चाहे बादलों के तार हज़ार थे।

ना मानी हार हमने कभी वक़्त से हारकर,कितने ही पिये जाम शराब थे.

पैर न हिले कभी नशे में चूर होकर,हमको भी कहते लोग जब कभी जी जनाब थे,हमको भी कहते लोग जब कभी जी जनाब
थे।

Loading...